"कोरोना" की जंग को कमजोर करता जानलेवा "तब्लीगी जमात" ।

जहां पूरा विश्व इन दिनों कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है। वहीं भारत भी मजबूती से संघर्ष कर इस लड़ाई को लड़ रहा है। लेकिन अचानक भारत में "तब्लीगी जमात" जैसे संघटन ने इस लड़ाई को कमजोर करने की कोशिश की है। जो ना केवल पूरे भारत के लिए एक परेशानी का सबब बन गया है, बल्कि इस जानलेवा वायरस से मजबूती से लड़ रहे पूरे देशवासियों के सामने एक चुनौती भी खड़ी कर चुका है। सर्वप्रथम इस विवादित "तब्लीगी जमात" के इतिहास पर नजर दौड़ाएं , तो यह संघटन एक तरीके से पूरे विश्व में "सुन्नी इस्लामी धर्म" के प्रचार एवम प्रसार के लिए खड़ा किया गया अंदोलन माना जाता है। गौरतलब बात यह है कि इस तब्लीगी जमात का जन्म भारत में ही सन 1926-27 के दौरान हुआ था।  इसकी नीव मौलाना मुहम्मद इलियास ने रखी थी। माना जाता है कि इसी मौलाना मुहम्मद इलियास द्वारा लोगों को इस्लामी शिक्षा देने के उद्देश्य से दिल्ली से लगे हुए शहर "मेवात" में इस कार्य को शुरू किया था। बाद में उन्होंने इस आंदोलन का विस्तार कर न सिर्फ सम्पूर्ण भारत में इसे फैलाया, बल्कि पूरे विश्व में भी इस आंदोलन को खड़ा किया गया। वर्तमान में  एक रिपोर्ट के अनुसार इस "तब्लीगी जमात" के सक्रिय सदस्यों की संख्या लगभग 150 मिलियन के करीब है। इनकी सर्वाधिक संख्या दक्षिण एशिया में मानी जाती है। जबकि पूरे विश्व के लगभग 195 देशों का इस जमात से जुड़े होने का दावा है।
 इस तब्लीगी जमात में सदस्यों को इस्लाम की शिक्षा के साथ साथ उन्हें कट्टरता, अपनी संस्कृति और धार्मिक परम्पराओं के प्रति जागरूक किया जाता है। जबकि मुस्लिम धर्म के "सुन्नी देवबन्दी इस्लाम" समुदाय को इस जमात का अनुयायी माना जाता है। धर्म के प्रचार तक सीमित यह आंदोलन कुछ हद तक सही हो सकता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जिस तरह से इस तब्लीगी जमात से जुड़े लोगों , इनके आकाओं का गैर जिम्मेदाराना रवैया, सरकार के आदेशों के खिलाफ इनके कृत्य, कोरोना की जंग में दिन रात लगे प्रशासन और डॉक्टर्स के साथ इनके द्वारा किए जा रहे दुर्रव्यवहार की खबरें ना केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं, वरन निंदनीय भी है। यह जिस तरह से पूरा भारत हर स्तर पर इस लड़ाई को लड़ने में अपना योगदान दे रहा है, खुद इस समुदाय से जुड़े तमाम मुस्लिम डॉक्टर्स , अधिकारीगण , मुस्लिम पुलिस कर्मी, यहां तक कुछ मुस्लिम संस्थाएं भी इस संकट की घड़ी में अपने कर्तव्यों का पालन कर, कंधे से कंधा मिलाकर देश के साथ खड़े हैं, वहीं इन चंद लोगों द्वारा इस लड़ाई और जीत के बीच बाधाओं को खड़ा करने का कार्य किया जा रहा है।
हर दिन आ रही खबरों के बीच इस ऐसा लग रहा है मानो जमात द्वारा इस वायरस को और अधिक पैमाने पर फैलाया जा रहा है। हालांकि बहुत से लोगों का ऐसा भी मानना है कि वायरस की सहायता से इन लोगों का उद्देश्य जेहाद को फैलाना है। वास्तव में  इनके द्वारा आए दिन (कोरोना वॉरियर्स) डॉक्टर्स और पुलिस कर्मियों से किए जा रहे व्यवहार के कारण भी लोगों की इस धारणा और उनके जेहाद फ़ैलाने के तर्कों की पुष्टि करता हुआ दिखाई भी दे रहा है। ऐसे में प्रशासन को भी इन लोगों पर कड़ी नजर रखकर , जांच एजेंसियों की मदद से इस प्रकरण की जांच करनी चाहिए। 
 इस जमात द्वारा जिस तरह से निज़ामुद्दीन में अल्लामी मशवरा (कार्यक्रम) 17 से 19 मार्च 2020  को आयोजन किया था। जबकि इसमें विदेशों से आए बहुत से इस्लामी धर्म गुरु भी शामिल हुए थे। 2 से 3 हजार के बीच इनकी जनसंख्या यहां मौजूद थी। यह संदेह है कि इनमें से कुछ स्पीकर कोरोनावायरस से संक्रमित थे, जो बाद में मंडलियों में फैल गए। जबकि दूसरी ओर 13 मार्च 2020 को, दिल्ली सरकार द्वारा यह आदेश दे दिया गया था, कि कोई भी बड़ा आयोजन, आईपीएल जैसा बड़ा इवेंट, सम्मेलनों या किसी भी बड़े कार्यक्रम जिसमें 200 से अधिक लोग उपस्थित हों, उन्हें दिल्ली में अनुमति नहीं दी जाएगी। बाबजूद उसके सरकार के आदेशों को ताक पर रखकर, बहुत ही गैर जिम्मेदार रवैया दिखाकर इनके द्वारा इस आयोजन को अंजाम दिय गया। फिर केंद्र सरकार द्वारा संपूर्ण देश में लॉक डाउन की घोषणा के बाद भी इस जमात द्वारा इतनी बड़ी जनसंख्या को एक जगह इकठ्ठा होने की खबर को प्रशासन से छुपाना, उल्टा यहां भाग लेने वाले सदस्यों द्वारा छिपकर बिना स्वास्थ्य जांच के देश के अन्य हिस्सों में जाकर कोरोना जैसी महामारी को और तीव्र गति से फ़ैलाने का कार्य किया गया।  हालांकि प्रशासन द्वारा महामारी रोग अधिनियम, 1897 में अन्तर्गत कानूनी कदम उठाकर इन्हें वहां से निकालकर इनके निज़ामुद्दीन आयोजन स्थल को बन्द किया गया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इस बात की पुष्टि पिछले कुछ दिनों में इस वायरस के भारत में फैलते प्रकोप से भी की जा सकती है। पिछले तीन दिनों में इस वायरस की चपेट में आए लोगों में से लगभग 60% लोग इसी तब्लीगी जमात से जुड़े हुए पाए गए। इनके द्वारा न सिर्फ अपनी जान को खतरे में डाला गया, बल्कि जहां - जहां ये लोग गए, उन सभी राज्यों में प्रभावित लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 4 अप्रैल को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कुल सक्रिय केसों का 30% सिर्फ "तब्लीगी जमात" का है।
 हालांकि तब्लीगी जमात के निजामुद्दीन गुट के प्रमुख मुहम्मद साद कांधलवी एवम अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा महामारी रोग अधिनियम के तहत मामला भी दर्ज कर दिया गया है। अब चिंता इस बात की है कि कहीं इनकी लापरवाही का खामियाजा पूरे देश को ना भुगतना पड़े। जिस तरह से पूरा देश संयम से इस वायरस के खिलाफ एक साथ खड़ा नजर आ रहा है, वहीं समाज के इन दुश्मनों द्वारा अपने मानसिक दिवालियापन के कारण हम सब की इस लड़ाई को कमजोर करने का कुकृत्य ना केवल अक्षम्य है। बल्कि देश की एकजुटता की परीक्षा लेता इस जानलेवा वायरस की जैसे मदद कर देश के खिलाफ सढ़यंत्र रचने का कुकर्म भी इनके द्वारा किया गया है। अब जिम्मेदारी हम सब के उपर भी है कि समाज के इन दुश्मनों का हर स्तर पर बहिष्कार कर दौगुनी छमता से एकजुटता दिखाकर शासन और सरकार द्वारा दी जा रही हर गाइडलाइन का पालन करना होगा। जिससे कि पिछले कुछ दिनों  से पूरे देश में तीव्रता से फैलते इस जानलेवा वायरस की चिंताजनक स्थिति से देश उबर सके।
             
                  ©® कुन्दन सिंह चौहान

टिप्पणियाँ

  1. bahi india ko is virus se kahatra nahi hai india ko in jese chuty**a logo se khtra hai
    ye sab pade likhe anpad log hai..

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  2. Tabligi jamat jaise sanghthan bahut khatarnak h..Agar jald hi inko ban nahi kiya gaya yo ye desh samaj k liye bahut bada khtra sabit honge.

    Baki hamesha ki tarh bahut accha likha h bhai.

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  3. सही, सटीक और तथ्यपूर्ण लेख .... ये उन्मादी, उतपाती जिहादी हैं .. इन पर नियंत्रण रखना जरूरी है। ऐसे लेख से शायद seculars की आंखें खुल जायें।

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  4. बहुत सुंदर, समसायिक विषयों पर जब भी लिखें उसे मेसजभी करें।
    शुभकामनाएं #भौंपू

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  5. सटीक जानकारी के लिये बहुत बहुत शुक्रिया ।

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  6. क्या भारत के मुस्लिम धर्म भर्मित हो रहे थे ,,इस प्रकार गलत समय पर जमात जरूरी थी क्या, क्या देश जरूरी नहीं है???

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