"भाग्य तू प्रवेश कर.."
जिंदगी की गुफा,
उम्र का मुहाना,
संकरा सा वक्त,
भाग्य तू प्रवेश कर!
संघर्षों का सितम,
उम्मीदों का बोझ,
लड़खड़ाते कदम,
भाग्य तू प्रवेश कर!
आसमां बनी मंजिल,
सीढ़ियां भी तोड़ती दम,
चड़कती हैं हर कदम,
भाग्य तू प्रवेश कर!
सब्र भी है थक चुकी,
वक्त भी खफा - खफा,
आशा आ फिर से भर,
भाग्य तू प्रवेश कर!
संयम भी रूठने को है,
कोशिशें भी पूछती हर पल,
छोड़ा हुआ क्यों मुझे अधर,
भाग्य तू प्रवेश कर!
अरसे हुए सांझ को,
निशा भी तैयार बैठी,
अब तो तू सूर्योदय कर,
भाग्य तू प्रवेश कर!
©®कुन्दन सिंह चौहान
👍👍👍 बहुत खूब। उम्र है थम सी गई, जिंदगी है जम सी गई। किस्मत का उजाला ले, भाग्य तू प्रवेश कर😊
जवाब देंहटाएंआभार पुष्कर भाई।
हटाएंबहुत सुंदर 💐💐💐💐💐💐
जवाब देंहटाएंआभार।
हटाएंWow!! Nice lines🌼
जवाब देंहटाएंThanks Akshay ..
हटाएंBhut sunder sir
जवाब देंहटाएंThanks sir..
हटाएंBahut khoob ,likhte raha karo.
जवाब देंहटाएंआभार निशांत भाई । स्नेह बना रहे।🙏
जवाब देंहटाएंबहुत प्रेरणादायी 👍👍
जवाब देंहटाएंआभार।
हटाएंअति सुंदर पंक्तियाँ 👌👍 शुभकामनाएं आपको💐
जवाब देंहटाएंआभार भाई जी।
हटाएंnice
जवाब देंहटाएंKrishna @wohkrishnahai
Thanks Krishna ji
हटाएंजिन्दिगी अपनेआप में शायद एक संघर्ष है।
जवाब देंहटाएंपर हमारी मनोदृष्टी इस संघर्ष को शायद एक नया मोड / नया आयाम देती है।
एक चित्र उकेरती है आपकी कविता
बहुत संवेदनशील
बहुत मार्मिक
और मन भारी हो जाता है।
आभार भाई साहब।
हटाएंप्रेरणादायक कविता🙌
जवाब देंहटाएं"भाग्य तो प्रवेश कर"....