हम बन जाएं, पूर्ण विराम एक साथ

अपनी कविताओं में 
खोजता हूं तुम्हें
और तुम शब्द – शब्द में
नजर आते हो मेरे साथ।

हर पंक्ति को जैसे 
ताल से ताल मिलाकर 
पूरा करते हो मेरे साथ।

कहीं थक कर 
ठहरना हो कुछ देर
तो हर अल्प विराम में
तुम ठहरते हो मेरे साथ।

चिन्हों , मात्राओं की
हर त्रुटियों में भी
कंधे से कंधा मिलाकर
खड़े मिलते हो तुम साथ।

बस चाहता हूं
यूं ही अंतिम पंक्ति तक
हम बन जाएं 
पूर्ण विराम एक साथ।

– कुन्दन कृति

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