काश..

काश..
ग्लोबल वार्मिंग का असर 
निर्मम हृदयों पर भी हो पाता 
तब वे भी पिघल पाते
हिमनदों की तरह 
और बहते 
प्रेमी नदियों की तरह।

– कुन्दन कृति

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