रिश्तों के बांध..

बांधो को टूटते नही देखा कभी
उनकी मजबूती पर 
अनायास ही जलन सी होने लगती है
कभी कभी।
उन्हें इतना मजबूत बांध लिया 
जाता है कि
प्रकृति जब सब कुछ खत्म
करने को आतुर होगी,
तभी बांध भी खत्म होंगे।
मगर
बांधो को मजबूती देने वाले मानव 
कभी खुद को परस्पर नही बांध पाए
बांधो जितना मजबूत।
निम्नतम रिएक्टर स्केल के
गलतफहमियों के भूकंप भी
तोड़ देते हैं
रिश्तों के बांध।

– कुन्दन कृति

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